सेक्युलारवादियों के द्वारा हिंदू धर्म की उपेक्षा

HINDUTVAहिंदू धर्म एक ऐसा धर्म है है जो यह कहीं से नहीं सिखाता की किसी धर्म का अपमान करें या किसी धर्म की भावनाओं के साथ खेलें| आज कल एक सामान्य सी चर्चा हो गयी है की चर्च में पत्थर फेंके गये चर्च मे चोरी हुई, चर्च में सामान इधर उधर बिखरा हुआ मिला|अगर इस तरह की घटनाएँ अगर शरारती तत्वों के द्वारा जानबूझकर की जा रही हैं तो यह पूरी तरह से ग़लत है और मैं इसकी पूरी तरह से घोर निंदा करता हूँ|

इसकी तरह की जो घटनाक्रम जो हुए हैं वो मिडिया के द्वारा बार बार दिखाए जाते हैं| पर हमारे मंदिरों में जो चोरियाँ होती हैं वो बस एक लाइन की सुर्खियाँ बन कर रह जाती हैं| मैं ज़्यादा दिन पहले नहीं जाउँगा अभी 15 मार्च 2015 (http://timesofindia.indiatimes.com/city/bareilly/Burglars-steal-6-idols-donation-box-from-Puranpur-temple/articleshow/46575904.cms) को पीलीभीत में एक मंदिर में चोरी हो गयी इस घटना पर मीडिया में कोई बहस नहीं हुई|

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इस पर सेक्युलरवादियों  ने उंगली नहीं उठाई क्यों? क्यों की ये सेकुलारवादी हिंदू संस्कृति से घ्रणा करते हैं|  उन्हें अपने देश में ही बेगाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं|  सेक्युलरवादियों के लिए मंदिर में चोरी होना कोई घटना नहीं है| ये समझते हैं की मोदी तो हिंदुत्ववादी है, आर. एस . एस हिंदुओं के साथ जुड़ा हुआ है तो हम वैसे भी सेकुलारवाद के ठेकेदार हैं | मंदिर को कुछ भी हो हमें क्या मतलब अगर हिंदुओं के धार्मिक स्थलों के साथ खिलवाड़ होता है तो हो हमें हिंदुओं से कोई सहानुभूति नहीं है|

हे सेकुलारवादियों सुधार जाओ अभी तो 44 हो कुछ दिन बाद कॅंडिडेट चुनाव लड़ाने के लिए ढुड़ने पड़ेंगे

एक और घटना हुई जनवरी माह में हुई (Theives Steal from Temple ) उसकी भी कहीं बहस नहीं हुई|

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मीडीया को चर्च और मस्जिद बड़ी दिखती हैं मंदिर कहीं दिमाग़ से और दिल से ओझल हो चुके हैं क्या? वो भी इसी धरती पर अस्तित्वा रखते हैं और उसके साथ करोणो हिंदुओं की भावनाएँ जुड़ी हुई हैं|

एक और घटना देखो| इसको ही दिखा देते

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एक और घटना

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ये सब क्या है अपने ही देश में हिंदू मंदिरों के साथ सौतेला व्यवहार और सेक्यूलरवादियों के द्वारा हिंदुत्व के लिए अनदेखापन|

हिंदू नेताओं को जिले मे प्रवेश करने का अधिकार नहीं होता है| मैं ज़्यादा दिन पुरानी बात नहीं कर रहा हूँ| अभी 8 मार्च की बात है, कर्नाटक में कॉंग्रेस की सरकार है, विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया को उडुपी जिले में प्रवेश करने में रोक लगा दी गयी| हिंदुओं को अपने ही देश में ही बोलने का अधिकार नहीं रह गया है?

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हिंदू अपनी शक्ति जनता है और उस शक्ति का सही जगह पर सही समय पर उपयोग करता है और कर रहा है| वो अहिंसा पर विश्वाश रखता है और हमेशा रखता रहेगा और “सर्वधर्म सद्भाव” की पताका को हमेशा उँचा करता रहेगा

Reference: http://timesofindia.indiatimes.com/

http://www.theborneopost.com

http://www.thehindu.com

http://www.mvariety.com/

स्वच्छ भारत के कूड़े को कूड़ेदान की ज़रूरत

By Gaurav Mishra

Final-Swachh-bharat-MIB-Google+-Cover-Page_01स्वच्छ भारत अभियान का आरंभ प्रधानमंत्री जी ने 2014 मे गाँधी जयंती वाले दिन किया| यह आरंभ भारत को एक नयी दिशा में ज़रूर ले जाएगा| मैं एक सामान्य सी बात कर रहा हूँ| स्वच्छता तभी होगी जब हम कूड़े को यथास्थान पर डालेंगे| पर डालेंगे कैसे? क्यों की हमें कूड़ेदान दिखाई नहीं देता है|मुझे लगता है की अगर हर ५० मीटर में एक कूड़े डालने की एक जगह हो तो लोग चलते फिरते उसी में कूड़ा डालेंगे| dustbinये जो तस्वीर देख रहें हैं उपर वो शिलांग के कूड़ेदान की है| शिलांग मे आपको मुश्किल से कहीं कूड़ा दिखे हर थोड़ी दूरी दूरी पर इस तरह के कूड़ेदान आपको दिखाई दे जाएँगे| सबकी वहाँ आदत हो चुकी है इसी टोकरी मे कूड़ा डालने की| अगर यही टोकरियाँ हमारे पूरे देश में लग जाएँ तो इससे बहुत से फायदे होंगे

  • इन कूड़ेदानों के लिए सरकार को कोई ज़्यादा खर्च नहीं करना पड़ेगा|
  • कोई लाखों करोड़ों का बजट भी नहीं पास करना पड़ेगा|
  • हर ५० मीटर की दूरी पर कूड़ादान होने से लोंगों की आदत मे सही जगह कूड़ा डालना आएगा|
  • जब सब सही जगह कूड़ा डालेंगे तो गंदगी भी कम दिखाई देगी|
  • जब गंदगी कम दिखाई देगी तो लोंगों को गंदगी ना देखने की आदत पड़ेगी|
  • जब गंदगी ना देखने की आदत पड़ेगी तो वो खुद कूड़ा नहीं फ़ैलाएँगे अगर उन्हें कहीं आस पास कूड़ादान नहीं दिखता है|
  • कूड़ादान नहीं दिखेगा तो वो कूड़ादान ढूढ़ने की कोशिश करेंगे और फिर वहीं पर कूड़ा डालेंगे|
  • इससे हमारे देश की वैल्यू भी विश्व में “स्पिटिंग कंट्री” से ज़्यादा स्वच्छ देशों में अपना नंबर आएगा|
  • बीमारियों में कमी आएगी|
  • लोग स्वस्थ बनेंगे|
  • लोग स्वस्थ बनेंगे तो लोग देश के और कामों में हाँथ बटाएँगे|
  • इससे हमारे मेघालया की तारीफ हर जगह होगी|
  • मेघालय के लोंगों को सम्मान मिलेगा|
  • उन्हें जो अलग-थलग वाली भावना में रहना पड़ता है उससे वो उपर आएँगे|
  • देश के साथ मुख्य धारा में बहेंगे|
  • इससे वहाँ के जो कूड़ेदान के कुशल कारीगर हैं उनको रोज़गार मिलेगा|
  • हमारे एक राज्य के लोंगों के जीवन स्तर में सुधार होगा|
  • हमारे देश के और राज्य विकसित राज्यों की श्रेणी में आएगा|

मेघालय में एक गाँव है नाम है उसका “मावल्यंनोंग”| बहुत ही कम लोंगों को इस गाँव के बार में पता है| यह गाँव एशिया के सबसे स्वच्छ गावों में एक है| यहाँ की स्वच्छता देखकर आप भी हैरान रह जाएँगे| बहुत खूबशुरत है यह गाँव| देश को इस गाँव के मॉडल को अपनाना चाहिए| cleanest मैं अपनी केंद्र सरकार से अनुरोध करता हूँ की देश को कूड़ेदानों की बहुत ज़रूरत है कृपया करके आप मेघालय के मॉडल को पूरे देश मे फ़ैलाएँ| और देश को स्वस्थ बनाने में एक कदम आंगे बढ़ाएँ|

Adhigrahan ke naam par ANNA Ne Karwaya Apna Adhigrahan

By Gaurav Mishra

Anna2 दिन पहले से अन्ना जी फिर से चर्चा में आए| बताया गया की वो जंतर मंतर आ रहे हैं भूमि अधिग्रहण क़ानून के खिलाफ आंदोलन करने| बताते हैं की अन्ना जी चार्ट्ड प्लेन से आए हैं दिल्ली| अगर ऐसा है तो बहुत दुखद है कि अब आंदोलन के लिए लोंगो को बड़ी जल्दी से पहुँचना होता है कार्यक्रम स्थल में|आंदोलन भी आजकल एक ज़रिया बनते जा रहे हैं राजनीति करने का कार्यस्थल|

आज अन्ना जी जनता के साथ नहीं बैठे थे आज तो वो नेताओं के साथ बैठे थे| नेताओं के साथ बातचीत कर रहे थे कि सत्तापक्ष मे कैसे आरोप लगाये जाएँ| उन्होंने बहुत सारे बिंदु राजनीतिक पार्टियों से इकठ्ठा कर लिए हैं| ऐसा प्रतीत होता है की अन्ना अब राजनीतिक लोंगों के एक दूसरा पहलू हैं|

आज केजरीवाल जी भी अपनी दिल्ली का काम छोड़कर अपने मूल काम “धरना” देने अन्ना के साथ बैठे थे| सही है अन्ना जी आप ही सबने “U” टर्न लेना सीखा है| पहले तो बड़ा बड़ा कहते थे की मेरे साथ कोई नेता मंच शेयर नहीं करेगा| फिर आज ये क्या है|

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किसानों के अपने आंदोलन को अन्ना ने अपने प्रचार का ज़रिया बना लिया| अब बेचारे किसान इतना दूर चलकर अपनी बात सरकार से कहने आए थे उनका कहीं भी पता नहीं चला पर मीडीया ने अन्ना जी को बहुत भुनाया| अन्ना जी को भी अच्छा लगा की चलो फिर से कुछ दिन मैं मीडीया में बना रहूँगा| यह भी एक ख़ास किश्म की बीमारी होती है| अपने आपको बार बार सामने लाना और लोगों से आकर्षण पाना|  चलो अन्ना जी को भी अच्छा लगा होगा अब| अन्ना जी पूरी तरह से खुश रहने चाहिए तभी तो राजनीतक पार्टियों का काम चलेगा| वैसे भी हर मीडीया हाउस किसी ना किसी पार्टी के लिए अच्छा ही बोलता है| पारदर्शिता लोंगों में हो सकती है पर ऑर्गनाइज़ेशन में हो यह कहना थोड़ा  जल्दी होगी|

अन्ना जी ने कल कहा की “यह सरकार अंग्रेज़ो से ज़्यादा ज़ुल्म ढा रही है”| तो मतलब अँग्रेज़ जो हमारे देशभक्तों को फाँसियों पर लटका देते थे वो कम था| अब तो आप के साथ उससे भी ज़्यादा अत्याचार हो रहा है ना? आपको काला पानी से भी ज़्यादा कठोर सज़ा दी जा रही है ना? आपको खड़े खड़े गोलियों से भून दिया जा रहा है ना? अन्ना जी से बस बड़ी-बड़ी बातें करने को कह लो| कुछ भी जो मन में आए वो बोल दो| ज़्यादा उल्टा सीधा बोलेंगे तो मीडीया ज़्यादा तवज्जो देगा उनकी कही हुई बात को बार बार फ्लेश करके दिखाएगा| तो उनका भी कुछ दिन काम चलेगा| सही हैं अन्ना जी!

अन्ना जी से अभी पूछ लो भूमि अधिग्रहण बिल के सभी बिंदुओं के बारे में वो २० बिंदु भी ठीक से बता दें तो बड़ी बात होगी| उनको बस निमंत्रण मिला है आंदोलन करने के लिए तो कुछ दिन दिल्ली में गुजारने आए हुए हैं|

Ghoshnapatra – Desh ka Vikas hoga Ya fir se murakh banegi janta

By Gaurav Mishra

जब भी कोई नई सरकार के लिए चुनाव होने वाले होते हैं तो एक नया घोषणा पत्र आ जाता है| हर पार्टी एक घोषणा पत्र लेकर आती है| इस नये घोषणा पत्र में नये वादे होते हैं, नई विकास की कुछ योजनाएँ होती हैं और कुछ नयी आशाएँ होती हैं जनता के लिए|

किसी का 60 सूत्रीय घोषणा पत्र होता है, किसी का १०० सूत्रीय घोषणा पत्र होता है सभी पार्टीस के अपने-अपने घोषणा पत्र होते हैं और सभी पार्टियाँ उन बिंदुओं पर चुनाव लड़ती है| उन बिंदुओं को वो जनता के सामने लाती है और ये बताने की और जनता के भवनाओं में समाहित करने की कोशिश करती है कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आती है तो इन बिंदुओं को क्रियान्वित रूप दिया जाएगा|

चुनाव के माहौल में जो विपक्ष होता है वो सत्ता पक्ष के उपर प्रहार करते हैं कि आपने अमुख वादा पूरा नहीं किया , ये वाडा पूरा नहीं किया और फिर सत्ता पक्ष उस पर अपनी सफाई देता है की इन कारणो की वजह से ये काम नहीं हो पाएँ हैं और जब हम आएँगे तो इन पर काम होगा| उनके पास बहुत से कारण होते हैं बताने के लिए की कौन सा काम क्यों नहीं हुआ| ठीक है हो सकता है की कुछ वजह रही होगी जिसकी वज़ह से सत्तारूढ़ सरकार काम नहीं कर पाई होगी| पार्टीयोंके पास भी बहुत से बहाने और कारण होते हैं जनता को बताने के लिए|

अब बात आती है की जनता को धोखा क्यों दिया गया? राष्ट्र सर्वोपरि है उसके विकास के साथ धोखा क्यों किया गया? जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ क्यों किया गया? क्यों नही घोषणा पत्र के सभी बिंदुओं को अक्षरशः पालननहीं किया गया?

इसमें 70% सरकार का दोष है की उन्होने अपने कहे हुए वादे पूरे नहीं किए और 30% जनता का भी दोष है की उन्होंने अपने कामों का बीच-बीच में सरकार से जवाब नहीं माँगा, अपने लिए किए हुए वादों का स्टेटस नहीं माँगा की कितना काम हो गया है और कब तक वो काम ख़त्म हो जाएगा|

क्या घोषणा पत्र के हर एक बिंदु की एक डेडलाइन नहीं होनी चाहिए| और उस डेडलाइन को मॉनिटर करने के लिए एक विश्वासनीय संस्था होनी चाहिए जो सरकार द्वारा किए गये वादों को मॉनिटर कर सके और लगातार एक स्टेटस जनता को पहुँचाता रहे| इससे एक स्वच्क्ष पारदर्शिता दिखेगी सरकार और जनता के बीच| इससे एक जवाबदेही बनेगी सरकार की जनता के लिए| इससे एक डर भी बनेगा सरकार में की केवल बड़े-बड़े वादों से काम नहीं चलेगा काम भी करना पड़ेगा|

पिछले साल का मैं कॉंग्रेस का घोषणा पत्र पढ़ रहा था उसमें मैने 29 मुख बिंदु देखे जिनमें उन्होने “We will”  लिखा हुआ था| इन बिंदुओं के अलावा भी होंगे मैने केवल इतनों मे ध्यान दिया| अगर 60 साल के शासन काल को देख लिया जाए तो कुल मिलाकर 360 बिंदुओं पर कॉंग्रेस ने काम करने की सोंची होगी और उनमे से शायद बहुत से काम करे भी होंगे और बहुत से काम नहीं भी करे होंगे| पर अगर ये सोंचो की ये सभी बिंदु अगर देश में चल रहे होते तो देश आज कहाँ से कहाँ तक पहुँच चुका होता| पर ऐसा नहीं हुआ हर चुनाव में नया घोषणा पत्र आ गया| जनता को सपने दिखाए गये कुछ पूरे हुए कुछ अधूरे रह गये लेकिन पार्टी के लोग वैसे ही रहे देश भले ही पीछे रह गया हो पर वो ज़रूर आंगे बढ़ गये| कॉंग्रेस ने बहुत बुरी तरह से देश को खाया है| काम अगर 30% करा है तो खाया 70% है|

इसके बाद मैंने अपनी वर्तमान केंद्र सरकार का घोषणा पत्र पढ़ा | बढ़ा ही आकर्षक लगा , ऐसा लग रहा था की अब मुझे ऑनसाइट में विदेश जाकर काम करने की कोई ज़रूरत नहीं है| सब कुछ यहीं मिलने वाला है| जनता ने बहुत उम्मींदो से नयी सरकार को चुना है| और हमें पूरा भरोसा है की वर्तमान सरकार अपने घोषणा पत्र के एक-एक बिंदु का पालन करेगी|

अभी दिल्ली के भी चुनाव हुए आम आदमी पार्टी ने अपने 70 सूत्रीय घोषणा पत्र में बहुत ही लोक लुभावन वादे किए हैं| मैं अब बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हूँ की ५ साल बाद दिल्ली में ही राम राज्य आ चुका होगा और श्री रामलला अपना स्थाई आवास अब दिल्ली में बनाने की सोंचेगे|(व्यंग)

मुझे आज ही पता चला की केजरीवाल फिर से धरने पर जा रहे हैं| भाई यही करना थे इन्हे| अब भी समझ जाइए महोदय हर साल मे १४ वादे पूरे करने हैं और हर महीने मे कम से कम एक वादा| समय कम है और काम ज़्यादा अपनी सरकार और सरकार के लोंगो का पूरी तरह से उपयोग करते हुए काम करिए क्यों की हमें भी राम राज्य में जीना है और सिंगापुर का आनंद दिल्ली में ही उठाना है| ये सब फ़र्ज़ी के बयान मत दीजिए की धरना देना हमारा अधिकार है| अब तो सरकार मे हो और जो काम दिया गया है आपको, वो पूरी तन्मयता के साथ करिए वरना दिल्ली की जनता बहुत समझदार है! ५ साल बाद आपको फिर से उसके बीच में जाना है|

इसीलिए हर सरकार अपने किए हुए जीतने वादे हैं अपने घोषणा पत्र में वो पूरे करे| जनता की सेवा में अपना तन  और मन  पूरा लगा दे और जनता को किसी तरह से कोई धोखा ना दे|

BJP Ka Galat kadam Bihar me

यह आज सुनकर बड़ा आश्चर्य लगा की भारतीय जनता पार्टी मांझी को समर्थन देने जा रही है| हो सकता है की मैं ग़लत सोंच रहा हूँ,पर अगर मैं एक जनता की नज़र से देखता हूँ  तो भारतीय जनता पार्टी को ग़लत मानता हूँ| कुछ तो ग़लत हो रहा है अब पार्टी में ज़मीन से  सोंचने की आदत अब ख़त्म हो रही है|

दिल्ली में ग़लती करी की लोकसभा चुनाव के बाद तुरंत चुनाव नहीं कराए और अब ग़लती कर रहे हैं मांझी का समर्थन करके| विकास की राजनीति से हटकर अब जात वाली राजनीति में  उतर आए हैं| मांझी को मुख्यमंत्री पद का शौक है तो नीतीश को फिर से अपनी ताक़त दिखाने का| और भारतीय जनता पार्टी को बीच मे हस्तक्षेप करने का|

भारतीय जनता पार्टी के पास इकदम सही समय है बिहार के लोंगो के मन में विश्वास पैदा करने का| पता नहीं चल रहा है की कौन सा दिमाग़ लगा रहे हैं नेतागण| केवल कुछ प्रतिशत जाती वोटों के लिए बस खेल चल रहा है| ना मांझी को उन जाती विशेष से कोई लेना देना है और ना वोट जीतने के बाद उनकी कोई खबर लेगा |

भारतीय जनता पार्टी को इतना समझ में नहीं  आ रहा है की जो केवल एक पद और अभिमान के लिए अपने पद को छोड़ नहीं पा रहा है| और जो अपनी पार्टी का ना हो सका उसका कैसे भरोसा करा जा सकता है| इस पूरे घटनाक्रम में किसी को कोई लेना देना नहीं है कि बिहार की जनता का विकास कैसे किया जाए| सबको बस चिंता खा जा रही है की कैसे आय के श्रोत को निरंतरता दी जाए|

भारतीय जनता पार्टी को इस समय बिहार को एक जनता की पसंद का नेता सम्मुख किया जाए| और नेता अगर कोई युवा हो तो एक बहुत अछा संदेश जनता के बीच जाएगा | इस समय को भारतीय जनता पार्टी को ठीक से काम करने मे लगना चाहिए था ना की फ़र्ज़ी में दो लोंगो के बीच में नेता बनकर रंगबाज़ी और दिखावे के चक्कर मे रहना चाहिए था|

भारतीय जनता पार्टी को क्या पड़ी है दूसरे के मामले में टाँग अड़ाने की| वो ज.द.यु का आंतरिक मामला है| उनकी पार्टी का मामला है| भारतीय जनता पार्टी को कहीं से भी किसी भी तरह से कोई भी ज़रूरत नहीं थी की दूसरे पार्टी के मामले में हस्तक्षेप करें| बल्कि अपनी उर्जा बिहार के विकास के कामों मे लगाएँ| केंद्र सरकार द्वारा जारी करी जा रही योजनाओं को जनता तक पहुँचाएँ|

भारतीय जनता पार्टी वालें कहते हैं की हम महादलित के जो अधिकार हैं उनको बचाने की कोशिश कर रहे  हैं| आज की जनता बहुत समझदार हो गयी है, ऐसा कहीं से भी नहीं है की वो समझ नहीं रही है की आप क्या कर रहे हो| सब समझ में आ रहा है कि आप एक महादलित के बदले निम्न जाती के लोंगों को अपने वोट मे बदलने की कोशिश कर रहे हो| जो आपका मूल एजेंडा “विकास” का था उससे आप भटक रहे हो| जब आप विकास करोगे तो निम्न जाती के लोग भी आपके साथ आएँगे| ऐसा कुछ भी नहीं है की वो हट जाएँगे| वो भी उसी “विकास” की धारा मे बहेंगे|

भारतीय जनता पार्टी को करना चाहिए था की

  • विधानसभा चुनाव जो होने वाले हैं इस साल के अंत तक उसके लिए अभी से उम्मीदवार घोषित कर देना चाहिए|
  • अभी से उम्मीदवार घोषित कर देने से जो भी उम्मीदवार होगा अपने क्षेत्र का वो भारतीय जनता पार्टी  की विकास की योजनाएँ ठीक से वहाँ की जनता को बता सकेगा |
  • लगातार वहाँ की जनता के संपर्क में रहने से वहाँ की जनता के अंदर विश्वास पैदा होगा|
  • वो पुरानी सरकार की विफलताओं को पूरी तरह से उनके दिमाग़ में बैठाल सकेंगे|
  • मैने देखा है की जनता को ये भी नहीं पता होता है की अमुख चुनाव जिस पद के लिए हो रहा है उस पद के अधिकार के क्षेत्र में क्या क्या आता है| तो हर उम्मीदवार को ये भी बताना पड़ेगा की क्या क्या उनके अधिकार क्षेत्र में आता है और वो अगर जीत कर आते हैं तो उस क्षेत्र को क्या क्या देंगे|
  • अगर अभी से उम्मीदवारों का चयन हो जाता है तो कहीं अगर पार्टी मे विरोध का स्वर आ रहा होगा तो उस क्षति को इन महीनों में पूरा कर लिया जाएगा|
  • पार्टी के उम्मीदवारों को बड़ी बड़ी गाड़ियों मे बैठकर नमस्कार करते हुए नहीं चलना है| बल्कि पैदल चलकर अपने क्षेत्र के सभी घरों में जाकर अपनी उपस्तिथि देनी है और बच्चे से लेकर बूढ़े लोंगो से वहाँ की समस्याओं को जानना है और कोशिश करनी है की उन बिंदुओं को चुनाव घोंसना पत्र में शामिल करना है|
  • घोसना पत्र में शामिल करके उन समस्याओं के निवारण की समय सीमा भी जनता को बतानी है
  • घोसना पत्र के हर एक बिंदु का प्रचार डोर तो डोर कैंपनिंग के मध्यम से होना चाहिए| केवल बड़े से होर्डिंग लगाने से कुछ नहीं होगा|

 

“AAP” ka nahi Ab ye hain Delhi ke CM

kejariwalउपर जो चेहरा देख रहे हैं| वो अब एक मामूली चेहरा नहीं रह गया है| अब यह एक ७० विधानसभाओं वाले एक मध्यम से प्रदेश का मुख्यमंत्री है|

मेरी आदत ज़मीन से सोंचने की है| बहुत से लोग ये सोंच रहे होंगे की एक आम आदमी मुख्यमंत्री बन गया| क्या बात है!  बात तो है ही भाई| पर ऐसा कुछ भी नहीं है की आप अरविंद केजरीवाल को ही ऐसा अनोखा आदमी मानने लगें| भारत मे बहुत से लोग ऐसे हैं जो बहुत उँचे पद पर रहकर भी सामान्य जीवन से रहते हैं| मीडीया अगर उन्हे भी दिखाएगा तो लोंगो को खुद पर खुद अंतर समझ में आने लगेगा|

वैसे केजरीवाल जी ने मेहनत पूरी की है| १९९२ से उन्होने अपने समाज सेवा का सफ़र शुरू करा| और पूरी ईमानदारी के साथ मेहनत भी करी| लोंगो को सरकार की नाकामियों के बारे मे बताया और एक नया विकल्प दिया दिल्ली वालो को आम आदमी पार्टी बनाकर और उस विकल्प को दिल्ली ने स्वीकार किया और उन्हे दिल्ली की ज़िम्मेदारी भी दी|

२३ साल अपनी ज़िंदगी के देने के बाद उन्हे ये कामयाबी मिली है| इन सबमें ये बात रही की उन्होंने पुरजोर सरकार की नाकामियों को बताया और साकार की बहुत सी चीज़ों को अपने अनुसार ढालकर जनता को सरकार के विरुध करा और अपने पक्ष मे वोट डलवाए| ये एक नीति थी उनकी सरकार मे आने के लिए|

जनता में और मीडीया मे आजकल ये बात उठने लगी है की वाइ-फ़ाई कब आएगा| ये बहुत ही हास्यास्पद है की आप एक दिन मे ही सरकार से सब कुछ माँगने लगे पता है मुझे आपको फ़ेसबुक हर टाइम देखने की आदत हो चुकी है मोबाइल पर|

पर यह दिल्ली है भाई यहा के लोग अब बहुत तेज़ हो गये हैं| बोलते हैं की हमे कुछ दोगे तो तभी हम वोट देंगे| वैसे पहले भी जनता वोट देती ही थी जितना भी जनता को मिलता था उसी में दे  देती थी वोट|पर जनता को भी सोंचना चाहिए की जब आपने दूसरी पार्टियों से सब कुछ नही माँगा तो अब क्यों सब कुछ माँग रहे हो इस पार्टी से| दे देगी कुछ ना कुछ|

अभी सभी प्रवक्ता दिल्ली सरकार के कह ही रहे हैं की हम अपने ७० सूत्रिया वादों को पूरा करेंगे| जनता तो वैसे भी इंतज़ार कर ही रही है क्यों की अब तो आदत हो चुकी है इंतज़ार करने की इसे|

मेरी कुछ गुज़ारिश है मुख्यमंत्री जी से

पार्टी की टोपी पहनकर अब सरकार के काम ना करें| टोपी चुनाव के टाइम प्रचार करने के लिए सही है पर सरकार को पार्टी से अलग रखें| अब ये तर्क नही दीजिएगा की नेहरू भी टोपी पहनते थे| नेहरू टोपी उस टाइम के पहनावे मे था आपका पहनना आपका घमंड दिखता है| और ऐसा लगता है की सरकार अब एक पार्टी की हैं दिल्ली वालों की नहीं|

धरना मत दीजिएगा उससे आपको कमज़ोरी दिखती है आपके अंदर की शक्ति नही दिखती|

बेफ़ज़ूल के आरोप मत लगाइएगा की केंद्र सरकार सहयोग नहीं कर रही है| बहुत सी सरकारें अपने बल पर खड़ी है  सालों से| आप भी काम करिए|

आपने दिल्ली सरकार में एक भी महिला को कोई मंत्रिपद नही दिया| महिला शशक्तिकरण की आप बात करते हो और एक भी महिला नहीं है दिल्ली सरकार की कैबिनेट में यह एक महिलाओं के लिए आशावादी सोंच को कहीं से नहीं दिखता है आपकी बल्कि उनका अनदेखापन दिखता है|

आगे कुछ और सचेत करना होगा तो बताउँगा ….

Racism! What is going on Mr. President of America

Some days before Mr. Obama were invited by Bharat and he was the cheif Guest of Indian Republic day parade. Everyone was happy. And we were proud of hosting him. Some of the the important deals were also finalized.

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After return to America Mr. President of US Barack Obama said about religious intolerance in India. He told ”  in past years, religious faiths of all types have, on occasion, been targeted by other peoples of faith, simply due to their heritage and their beliefs – acts of intolerance that would have shocked Gandhiji, the person who helped to liberate that nation”

So I just thought some of the riots were also in US . So I search in google. I was shocked when I typed only “Racism riots in ” It suggested some options. The  number one option is a top search around the world was “racial riots in usa”

obama2Finaly I also searched with top search option “racial riots in usa”. Thanks to wikipedia he has all the things in his database. I was shocked there are multiple riots have been done in USA after independent .

Some of the data from wikipedia.

Civil Rights Movement and Black Power period: 1955–1977

1964

1965

1966

1967

1968

1969

1970

1971

1972

1973

1974–1988

1977

Since 1980

What is this Mr. Obama? You should also see. Why a great power of the world is not responsible for their citizen. Why are these type of riots in their country. Why Black and white word is used in your county. Please look in to your internal condition also.

ohh you will say now a days riots are in control there is no racism. So what the hell was done in Friday, Feb. 6, 2015 with Sureshbhai Patel. He was visiting from India, staying with his son, Chirag, his wife and child in their Madison home. After being in the States for almost a week, Sureshbhai was walking through the neighborhood, Friday, Feb. 6, 2015, when Madison Police Officers received a call about a “suspicious person” in the neighborhood. They found Sureshbhai, who couldn’t speak English, injuring him after forcing him to the ground. Sureshbhai has been in the hospital and left partly paralyzed.

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Mr. President Obama Please advise also to your government officials “We are all from one God.”  You got only one terror attack and suspect all the indians. Please pahle apne ko sambhal lo.

Reference:  http://republicdayparade.com/barack-obama-republic-day-parade-chief-guest/565/

http://en.wikipedia.org/wiki/Mass_racial_violence_in_the_United_States

 

गीलानी के भोले जल्लाद बनाम शहीद भारतीय सैनिक

By Gaurav Mishra

कुछ लिखने से पहले विकिपेडिया के इन आँकड़ो पर नज़र डालते हैं

Kashmir

Militant acts in J&K
July and August 1989 – 3 CRPF personnel and politician Mohd. Yusuf Halwai of NC/F were killed.
July and August 1989 – 3 CRPF personnel and politician Mohd. Yusuf Halwai of NC/F were killed.
1989 kidnapping of Rubaiya Sayeed daughter of the then Home Minister of India Mufti Sayeed.
1995 kidnapping of western tourists in Jammu and Kashmir- 6 foreign trekkers from Anantnag district were kidnapped by Al Faran, One was beheaded later, one escaped and other four remain untraced presumable killed.
1997 Sangrampora massacre – On 22 March 1997, 7 Kashmiri Pandits were killed in Sangrampora village in the Budgam district.
Wandhama Massacre – In January 1998, 24 Kashmiri Pandits living in the village of Wandhama were massacred by Pakistani militants. According to the testimony of one of the survivors, the militants dressed themselves as officers of the Indian Army, entered their houses and then started firing blindly. The incident was significant because it coincided with former US president Bill Clinton’s visit to India and New Delhi used the massacre to present a case against the alleged Pakistan-supported terrorism in Kashmir.
1998 Prankote massacre – 26 Hindu villagers of Udhampur district were killed by militants.
1998 Champanari massacre – 25 Hindu villagers killed on 19 June 1998 by Islamic militants.
2000 Amarnath pilgrimage massacre – 30 Hindu pilgrims massacred by militants.
Chittisinghpura massacre- 36 Sikhs massacred by LET militants.
2001 terrorist attack on Jammu and Kashmir legislative assembly On 1 October 2001, a bombing at the Legislative Assembly in Srinagar killed 38.
2002 Raghunath temple attacks – First attack occurred on 30 March 2002 when two suicide bombers attacked the temple. Eleven persons including three security forces personnel were killed and 20 were injured. In second attack, the fidayeen suicide squad attacked the temple second time on 24 November 2002 when two suicide bombers stormed the temple and killed 14 devotees and injured 45 others.
2002 Qasim Nagar massacre – On 13 July 2002, armed militants believed to be a part of the Lashkar-e-Toiba threw hand grenades at the Qasim Nagar market in Srinagar and then fired on civilians standing nearby killing 27 and injuring many more.
2003 Nadimarg Massacre – 24 Hindus killed in Nadimarg, Kashmir on 23 March 2003 by Lashkar-e-Taiba militants.
20 July 2005 Srinagar Bombing – A car bomb exploded near an armoured Indian Army vehicle in the famous Church Lane area in Srinagar killing 4 Indian Army personnel, one civilian and the suicide bomber. Militant group Hizbul Mujahideen, claimed responsibility for the attack.
Budshah Chowk attack – A militant attack on 29 July 2005 at Srinigar’s city centre, Budshah Chowk, killed 2 and left more than 17 people injured. Most of those injured were media journalists.
Assassination of Ghulam Nabi Lone – On 18 October 2005 suspected Kashmiri militants killed Jammu and Kashmir’s then education minister Ghulam Nabi Lone. Militant group called Al Mansurin claimed responsibility for the attack. Abdul Ghani Lone, a prominent All Party Hurriyat Conference leader, was assassinated by unidentified gunmen during a memorial rally in Srinagar. The assassination resulted in wide-scale demonstrations against the Indian forces for failing to provide enough security cover for Mr. Lone.
2006 Doda massacre : On 3 May 2006 militants massacred 35 Hindus in Doda and Udhampur districts in Jammu and Kashmir.
On 12 June 2006 one person was killed and 31 were wounded when terrorists hurled three grenades on Vaishnodevi shrine-bound buses at the general bus stand here this morning.
2014 Kashmir Valley attacks: There were four attacks on 5 December 2014 on army, police and civilians resulted in 21 deaths and several injured. Their motive was to disrupt the ongoing assembly elections.

उपर लिखे हुए जीतने भी आँकड़े हैं वो ये तो कही ना कही बताते हैं कि हमारी सरकारें कितनी उदासीन है कि वो मारकर कर चले जाते हैं और हम कुछ गोलियाँ दागकर और बयानबाज़ी करके छोड़ देते हैं.
हर साल 26 जनवरी मे हम अपने शाहिद सैनिको को सम्मानित करके एक प्रथा मे और एक नया साल जोड़ लेते हैं|

coffin
क्या हमारी सरकार का ये लक्ष्य नही होना चाहिए था की इस साल हम एक भी अपने सैनिक या नागरिक की बलि नही देने देंगे इन आतंकियोके द्वारा| क्या कोई अभेदया योजना नही होनी चाहिए थी आज तक की सरकारो मे| मैं मौजूदा सरकार की भी बात कर रहा हूँ| केवल ये कह देने से की वो एक मारे तुम 2 मारो , ये कोई योजना नही है|
हम हाफ़िज़ सईद जैसे लोंगो को दूसरे देश से लाने की बात करते रहते हैं  कभी अपने देश के अंदर मौज़ूद सैयद अली शाह गीलानी, यासीन मलिक, शेख याक़ूब,  शब्बीर शाह, मौलाना मोहम्मद अब्बास अंसारी, शकील बक्शी, अब्दुल घनी भाट, मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़,बिलाल घनी लोन, मोहम्मद उमर फ़ारूक़, सैयद क़ासिम शाह बुखारी, क़ाज़ी गुलाम मोहम्मद, गुलाम मुहम्मद बट, इश्तियाक़ क़ाद्री, अब्दुल गनी अज़हरी, मौलाना म. यासीन हमदनी, नूर-उल-हॅसन, अज़हर भट्ट, ताजमूल भट्ट, ज़ारन भट्ट, ज़ैद भट्ट, खोखर ए आज़म, साक़िब भट्ट, शेख याक़ूब, हिलाल अहमद वॉर, रफ़ीक़ अहमद मीर, मौलाना अब्दुल रशीद दाऊदी, मुहम्मद फेरूक रहमानी जैसे लोंगो की खबर ली है की इनका सीमा पार से कितने मधुर संबंध बने हुए हैं की उधर कश्मीर के नवयुवा को अछा ज्ञान देने के बजाए राइफ़ल चलाने की ट्रैनिंग देने के लिए भेज़ देते हैं और भारत विरोधी आतंकवादियो से मिलकर भारत के लिए साजिश रचते हैं|

Geelani
आज कश्मीर मे एक सेना का जवान मारा जाता है उसमे एक आतंकवादीभी मारा जाता है तो गीलनी उस आतंकवादी को शहीद कह देता है| उसका जुलूस निकाला जाता है| अफ़ज़ल गुरु को फाँसी होती है तो गीलानी आँसू बहानाशुरू कर देता है उसे अफ़ज़ल गुरु की लाश चाहिए होती है उस पर राजनीतिकरने के लिए, उसको शहीद बनाकर कश्मीर में जुलूस दिखाने के लिए| वो भारत में रह कर भी भारत विरोधी काम कर रहा है लेकिन हमारी सरकार कुछ नही कर रही है|
हमारी सरकारें चाहती है की हमारे सैनिक शाहिद होते रहें. घरोंके चिराग बुझते रहें| आज तक एक भी नेता के घर का चिराग कश्मीर मे जाकर शहीद हुआ है क्या? क्या कोई भी नेता अपने नये वंश को इंडियन आर्मी मे जाने को बोलती है क्या? नहीं!!. कभी नहीं होता ये| क्यों की ये जानते हैं की उनका घर वाला उनका चिराग है उनके वंश का और दूसरे के लड़के तो तो एक बेचारा नागरिक है जो देश के लिए कुछ कर गया|

funeral
हे नेताओं!! कुछ अभेद्या योजना बनाओ और उसको अपने घोसना पत्र की तरह हर देश वाशियों तक पहुचाओ जिससे उनके अंदर भी एक गर्व महसूस हो की हमारी सरकार हमारे बारे मे कितना सोंच रही है और उन राष्ट्र विरोधी लोंगो के अंदर इतना डर पैदा कर दो की या तो वो खुद आत्म समर्पण कर दे या तो फिर हमारे जवानो की गोलियाँ खाने के लिए तैयार रहें|

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार कुल मिलकर १२४ आतंकवादी भारतीय जेलों में बंद हैं| अगर हमारा एक सैनिक शहीद होता है तो एक आतंकवादी को निकालकर सबके सामने फाँसी दो| सालों की जान हलक मे आ जाएगी| सारा जेहाद का फितूर दिमाग़ से ख़त्म हो जाएगा और तमीज़ से रहना शुरू कर देंगे| और इन सबके बीच मे अगर मानवाधिकार वाले आएँ तो मैं निश्चित तौर पर कहता हू उनसे पूछ कर देख लेना की उन ढकोसले वालों के घर से एक भी व्यक्ति आज तक देश के लिए शहीद नहीं हुआ होगा| वास्तविकता मे इन मानवाधिकार वालो को अपनी उपस्तिथि दिखानी पड़ती है तो ये भी क्या कर सकते हैं|

अगर हम भावुकता भारी बातें करे तो हम कह सकते हैं की उन बच्चों से पूछो जिनके पापा अब कभी नही आएँगे, उन माओं से पूछो जिनके बेटे अब घर नही आएँगे, उन पत्नियो से पूछो जिनको अब हमेशा अब इंतज़ार करना पड़ेगा| इस तरह से बातें तो बहुत हो गयी| इन बातों का किसी पर असर पड़ा होगा? हो सकता है पड़ा भी हो| मुझे नही पता| हो सकता है की आप पर भी ना पड़ा हो पर क्या काश्मीर समस्या को जस का तस रखकर क्या हमारे देश की उन्नति हो सकती है? क्या हमारी लोकसभा और राज्यसभा में बैठे हुए सभी सम्मानित सांसद, हमारे राष्ट्रपति, देश के बड़े-बड़े विद्वान, राजनीतिक विश्लेषक, सभी नौकरशाह सब लोग एक साथ बैठकर एक दिन ले लें- दो दिन ले लें एक हफ़्ता ले लें, एक हफ़्ता बहुत है सोंचने के लिए और सभी तरह की राजनीति से दूर केवल और केवल राष्ट्रनीति को रखकर एक ऐसी योजना नहीं बना सकते हैं कि जिससे इस काश्मीर की समस्या को पूरी तरह से एक बार मे समाप्त कर दिया जाए| और देश के उन शहीद सैनिकों को एक सच्चा सम्मान दिया जाए|

NIA ने इन संगठनो को आतंकवादी बताया है

  1. Babbar Khalsa International
  2. Khalistan Commando Force
  3. Khalistan Zindabad Force
  4. International Sikh Youth Federation
  5. Lashkar-E-Taiba/Pasban-E-Ahle Hadis
  6. Jaish-e-Mohammad/Tahrik-e-Furqan
  7. Harkat-ul-Mujahideen/Harkat-ul-Ansar/Harkat-ul-Jehad-e-Islami
  8. Hizb-ul-Mujahideen/ Hizb-ul-Mujahideen Pir Panjal Regiment
  9. Al-Umar-Mujahideen
  10. Jammu and Kashmir Islamic Front
  11. United Liberation Front of Assam (ULFA)
  12. National Democratic Front of Bodoland (NDFB) in Assam
  13. People’s Liberation Army (PLA)
  14. United National Liberation Front (UNLF)
  15. People’s Revolutionary Party of Kangleipak (PREPAK)
  16. Kangleipak Communist Party (KCP)
  17. Kanglei Yaol Kanba Lup (KYKL)
  18. Manipur People’s Liberation Front (MPLF)
  19. All Tripura Tiger Force
  20. National Liberation Front of Tripura
  21. Liberation Tigers of Tamil Eelam (LTTE)
  22. Students Islamic Movement of India
  23. Deendar Anjuman
  24. Communist Party of India (Marxist-Leninist) — People’s War, All its formations and front organizations.
  25. Maoist Communist Centre (MCC), All its formations and Front Organisations
  26. Al Badr
  27. Jamiat-ul-Mujahideen
  28. Al-Qaida
  29. Dukhtaran-E-Millat (DEM)
  30. Tamil Nadu Liberation Army (TNLA)
  31. Tamil National Retrieval Troops (TNRT)
  32. Akhil Bharat Nepali Ekta Samaj (ABNES)
  33. Organisations listed in the Schedule to the U.N. Prevention and Suppression of Terrorism (Implementation of Security Council Resolutions) Order, 2007 made under section 2 of the United Nations (Security Council) Act, 1947 and amended from time to time.
  34. Communist Party of India (Maoist) all its formations and front organizations.
  35. Indian Mujahideen, all its formations and front organizations.
  36. Garo National Liberation Army (GNLA), all its formations and front organizations.

जै हिंद जै भारत

 

Reference: http://www.marxist.com/kashmir-ordeal-crisis.htm

http://archive.indianexpress.com/news/indian-jails-house-124-pakistanis-involved-in-terror-acts/884999/

http://en.wikipedia.org/wiki/Main_Page

Sabka Ghar Pakka Ghar

By Gaurav Mishra

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There should be one policy passed by the Government of India “Sabka Ghar Pakka Ghar”. There are following points would be in this policy:

  • Every citizen of India should have “ADHAR” number.
  • There should be a centralized data base on the basis of “ADHAR” number.
  • In this centralized database mapping of “ADHAR” number to “ADHAR” number holder’s Residential Home.
  • “ADHAR” number holder should be owner of particular mapped residential home.
  • If more than one residential home are mapped to unique “ADHAR” number holder then owner will have 6 months time to sell extra residential homes.
  • In next 6 months Owner will have to debit the entire selling amount in one bank.
  • In this case bank should have the responsibility bank should have PAN number details of all the bank account holders.
  • If owner is not able to sell extra property within 6 months. Then Government will take over all the extra properties and give the proper selling amount to the owner.
  • If any property will be sold out then all the details would be auto updated in the centralized data base.
  • If there is any forefathers home and main owner has died then according to current law that property would be divided in between heirs according to his will. But according to this law heirs would have only one residential home property it can be part or whole home.
  • If any owner has his residential property uses as a commercial then all the commercial property data would also be updated in the centralized data base.
  • By this way all the property would be mapped to PAN number and ADHAR number.
  • Government will built 1% home per year of every district population.
  • There will be no any reservation of allocation of Government Constructed homes except handicapped reservation.

continued…….

Conclusion:

  • By this way every citizen of India will have own home.
  • By this policy black money would be in bank .
  • Property Dealers will not take money as their wish.
  • Dream of the prime minister would be fulfilled “SABKA GHAR PAKKA GHAR”.
  • By this way cost of the property would be less.
  • Per man income would be increased.
  • Life standard of the citizen of India would be better.
  • Faith of the citizen of India would be increased with respect to central government.
  • Gap would be less between rich and poor people.

 

Reference:  http://www.tomcopelandblog.com

Wastage of food in front of government of India!

By Gaurav Mishra
FCI (Food Corporation of India) is a organisation which is reponsible for providing grains to all over the india. India is poor country and there are many people die in every year due to lack of food In the same country lakh metric ton grain was wasted between the year 2005-2013.

foodgrainA picture from (THE HINDU) shows birds feast on wheat spilling out of damaged sacks at an open storage facility of the Food Corporation of India on the outskirts of Karnal in Haryana.

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Indian government has the land for indutrialists to construct the multiplex and malls in the city. But the government has no any plan to save metric tonn grain of the country. Every time Indian Goverment stands like a begger in front of world. All the cetral goverments congress, BJP, UPA, NDA and all the other small parties didn’t raise any concern of wastage of food in the country. They didn’t do any dhrna, candle march, chakka jam for this wastage of food. Why they will do? . They have all the luxurious ammenties to live and they have concern only for own not for the country.

 

In India industrialist plan to construct the largest mall in the world or in the asia or in the country but government didn’t planed record number of FCI godowns in every city in india. Every government plan for the election campaign in evry city but after forming the government , central and state government don’t plan to construt a gowdown for the formers to save the food for the country.

Due to lack of infrastructure in India there are around 21 millions tonn of wheat wastage in every year in india. India grows the infrastructure problem is like a tumer and by this tumer every year a lot of tons food is waste.

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Reports says around 40% of all fruit wasts in every year due to lack of refrigerated godowns, rfigeratd transport, poor roads and corruption.

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There is no logistics in India. If government plans for the all the basic and usful amenties to prevent the wastage of food, corruption damages the roots of the goveernment rules and plans like a termite.Governement plans of the FDI to improve the logistics in india and improve the supply chain management technique by the use of FDI.

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Government sholud plan

  • Construct FCI godowns in every smal city to strore the grain for the near vllage formers.
  • There should be no mediator between the former and the consumer only FCI should a medium to deliver the grains to consumer.
  • Increase the number of cold storage truck.
  • In every godown of the FCI there should be on cold storage area for the fruits also.
  • Number of national highways should be increased and their link road to to big mandi should be increased.
  • Distribution system should be properly established.
  • Supply chain management should be properly monitored and should take action on the basis of requirement.
  • FCI should make sure all the rail wagons should be properly covered and cleaned.
  • In road transport wagons should be properly covered and neat and clean to prevent any type of bacteria in the grains.
  • There should be air tight steel container to store the grain.
  • There should be regular monitoring in all the levels to safe prservation of food in FCI godowns.
  • State governmenr and cetral gvernment should make the combined plan to construct the FCI godowns as per specifications on the basis of nature of area.
  • There should be included scietific practices to stor the grain.
  • There should be proper planning for to cover the bags of grins with proper material.
  • There should be plan to prevent the grain from insects in the godown.
  • Planning for the insect killer in the godowns.
  • There should be solar energy system for drying grain.
  • All the holes and pipes should be proprly monitored and guarded to prevent from Rats and insects.
  • There should be proper ventilation to prevent grain from moisture in godowns.
  • There should be scientific technique should be used by the help of scientists.

Reference:

http://www.thehindu.com/news/national/fci-admits-194-lakh-mt-foodgrain-wasted-between-200513/article5680994.ece

http://timesofindia.indiatimes.com/india/India-wastes-21-million-tonnes-of-wheat-every-year-Report/articleshow/17969340.cms